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हज़रत मोहम्मद साहब को मुशरिक भी मानते थे सादिक: मौलाना सय्यद राहिब हसन

 संवाददाता


लखनऊ: गोलागंज के मकबरा आलिया स्थित अज़खाने मज़हर हुसैन साहब में अशरे की चौथी मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना सय्यद राहिब हसन ने कहा कि अल्लाह ने हज़रत मोहम्मद साहब को रसूल बना कर भेजा और उन्हें लोगों के लिए हादी बना कर भेजा और कुरआन में साफ साफ एलान कर दिया कि मेरा रसूल वही करता है जो वहीए इलाही कहती है यानी मोहम्मद साहब अपनी मर्ज़ी से कोई बात नहीं करते हैं बल्कि अल्लाह बात करता है फिर भी लोग उनको नहीं मानते थे और काफिर व मुशरिक रहे।मौलाना ने कहा कि मोहम्मद साहब ने जो भी बात की वह अल्लाह के हुक्म से की थी हज़रत मोहम्मद साहब ने अपने खुतबे को रोक कर इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम को पहचनवाया के यह हुसैन हैं इन्हें पहचान लो तो वह अल्लाह के हुक्म से पहचनवाया लेकिन अफसोस की लोगों ने उनकी बात नहीं मानी और यह कह दिया कोई रसूल नहीं आया कोई कुरआन नहीं आया कोई वही नाज़िल नहीं हुई यह सब सिर्फ जादू था।अंत में मौलाना सय्यद राहिब हसन ने जनाबे हबीब इब्ने मज़ाहिर के मसाएब का ज़िक्र किया जिसको सुन कर अज़ादारों में कोहराम मच गया सब अपने अपने सरो को पीट कर रोने लगे।

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