Hot Posts

6/recent/ticker-posts

राजनैतिक अधिकार भोजवाल महाकुंभ का आयोजन हुआ संपन्न

 संवाददाता लखनऊ:

राजनैतिक अधिकार भोजवाल महाकुंभ का आयोजन किया गया जिसमें पूरे भारत से अखंड समाज के लोग पहँचे 
30 नवम्बर 1948 को संविधान सभा में टी0 टी0 कृष्णामाचारी ने खड़े होते हुए कहा था कि "क्या मैं पूछ सकता हूँ कि भारत के किन नागरिकों को पिछड़ा समुदाय कहा जाए"। गौरतलब है कि उस दिन संविधान सभा में इस बात को लेकर बहस चल रही थी कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा वे कौन से ऐसे वर्ग हैं जिन्हें राज्य द्वारा विशेष सुविधाएँ दी जानी चाहिये यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आजादी के 75 सालों बाद भी हम यह सुनिश्चित नहीं कर पाए हैं कि पिछड़ा कौन है और कौन नहीं? इस असफलता का ही परिणाम है कि आज राजनैतिक और सामाजिक तौर पर मज़बूत और समृद्ध जाति और समुदाय भी आरक्षण का लाभ लेने के लिये लामबंद दिख रहे हैं और जो वंचित हैं वे और दीन-हीन होते जा रहें हैं।हमारा भोजवाल समाज आज भी असंगठित है और भुर्जी / कान्दूं / भुजवा / भड़भूँजा / गुप्ता / मेहरा / चंद्रा / मधेशिया / भटनागर / माथुर / सक्सेना आदि लगभग 60 उपनामों (उपजातियों) में भोजवाल समाज बंटा हुआ है। इस बिखराव के चलते ही आज कोई भी राजनैतिक दल भोजवाल समाज की समस्याओं के प्रति गंभीर नही है भोजवाल समाज को संगठित करने करने के लिए सभी भोजवाल जातियों को मिलकर एक ही जातिसूचक विशेषण का प्रस्ताव सरकार को देना चाहिए और बिहार राज्य की तरह ही पूरे देश में जाति आधारित जनगणना की मांग रखना चाहिए।

Post a Comment

0 Comments