टीबी मुक्त भारत अभियान में सामूहिक भागीदारी आवश्यक- अमित कुमार घोष


 संवाददाता।
- उत्तर प्रदेश में फरवरी से फिर शुरू होगा 100 दिन का सघन टीबी रोगी खोज अभियान, राज्य ने दर्ज की उल्लेखनीय प्रगति
-टीबी मुक्त उत्तर प्रदेश पर ई-न्यूजलेटर का विमोचन
लखनऊ। टीबी मुक्त भारत अभियान की प्रगति को और सशक्त बनाने के उद्देश्य से आज लखनऊ में स्वास्थ्य विभाग,उत्तर प्रदेश सरकार एवं ग्लोबल हेल्थ स्ट्रैटजीज द्वारा संयुक्त रूप से एक राज्य स्तरीय मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता अमित कुमार घोष,अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा, उत्तर प्रदेश द्वारा की गई एवं टीबी मुक्त उत्तर प्रदेश पर ई-न्यूजलेटर का विमोचन किया गया। 
कार्यशाला में डॉ. पिंकी जोवल,मिशन निदेशक,राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तर प्रदेश डॉ. रतन पाल सिंह सुमन, महानिदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य सेवायें,उत्तर प्रदेश; डॉ पवन कुमार अरुण, महानिदेशक,परिवार कल्याण, उत्तर प्रदेश; डॉ एच0डी0 अग्रवाल, निदेशक, पी0एच0सी0,उत्तर प्रदेश; डॉ शुभा मिश्रा, निदेशक,राष्ट्रीय कार्यक्रम डॉ. शैलेन्द्र भटनागर,अपर निदेशक एवं राज्य क्षय रोग अधिकारी; डॉ. ऋषि सक्सेना,उप राज्य क्षय रोग अधिकारी,डॉ ए0के0 सिंघल,जिला क्षय रोग अधिकारी,लखनऊ; प्रतिनिधि चिकित्सा शिक्षा विभाग, पंचायती राज विभाग, खाद्य एवं रसद विभाग,मीडिया सहयोगी,स्टेट टीबी प्रकोष्ठ के अधिकारी एवं विभिन्न डेवलपमेंट पार्टनर्स उपस्थित रहे। 
कार्यशाला को संबोधित करते हुए अपर मुख्य सचिव ने कहा कि टीबी मुक्त भारत अभियान केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह अभियान जन-आंदोलन बन चुका है, जिसमें सरकार, मीडिया, डेवलपमेंट पार्टनर्स और समुदाय की सामूहिक भागीदारी आवश्यक है। 
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने पोर्टेबल, एआई-सक्षम हैण्ड हेल्ड एक्स-रे मशीनों का बड़े पैमाने पर विस्तार किया है, जिसके द्वारा बिना लक्षण वाले टीबी रोगियों की पहचान संभव हुई है। साथ ही, समुदाय स्तर पर अत्याधुनिक नैट (मॉलिक्यूलर) परीक्षण को प्राथमिकता दी गई है। प्रदेश में 930 नैट मशीनों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी मरीज को गुणवत्तापूर्ण जांच के लिए दूर न जाना पड़े।
उन्होंने कहा कि टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत 7 दिसंबर 2024 को देशभर में 100 दिवसीय सघन टीबी मुक्त भारत अभियान के प्रथम चरण शुरुआत की गई थी। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश ने क्षय रोग उन्मूलन की दिशा में अनुकरणीय प्रदर्शन हेतु भारत सरकार द्वारा सम्मानित किया गया है। 
अपर मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य में अभियान के दौरान 7 दिसम्बर 2024 से 17 जनवरी 2026 तक कुल 3.02 करोड़ जोखिम वाली आबादी जनसंख्या (वलनरेबल पापुलेशन) की स्क्रीनिंग की गई है। जांच सेवाओं के विस्तार के अंतर्गत जोखिम वाली आबादी की 81.29 लाख एक्स-रे जांचें तथा 24.79 लाख नैट परीक्षण किए गए, जिससे समय पर और सटीक निदान सुनिश्चित हो सका है। इस व्यापक प्रयास के परिणामस्वरूप 7.33 लाख टीबी रोगियों की पहचान हुई। साथ ही राज्य में लगभग 1.69 लाख बिना लक्षण वाले व्यक्तियों में टीबी की बीमारी का पता चला, जो प्रोएक्टिव स्क्रीनिंग और एडवांस डायग्नोस्टिक के असर को दिखाता है। 
अपर मुख्य सचिव ने यह भी उल्लेख किया कि सार्वजनिक-निजी सहभागिता के तहत कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के माध्यम से IOCS द्वारा महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया जा रहा है। IOCS के सहयोग से राज्य को 4 मॉड्यूल के साथ 74 टूनैट मशीनें उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे त्वरित और सटीक टीबी जांच को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, 75 एआई-सक्षम हैंड-हेल्ड एक्स-रे मशीनों के लिए क्रय आदेश (PO) जारी किए जा चुके हैं, जो भविष्य में टीबी स्क्रीनिंग और प्रारंभिक पहचान की क्षमता को और मजबूत करेंगे।
मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तर प्रदेश ने अपने संबोधन में बताया कि राज्य ने टीबी उन्मूलन की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। वर्ष 2015 की तुलना में टीबी इन्सिडेन्स अर्थात नए रोगियों की दर में 17 प्रतिशत की कमी लाई गई है। इस उपलब्धि में प्रयोगशाला जांच नेटवर्क के सुदृढ़ीकरण की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्ष 2017 की तुलना में 2025 तक राज्य में नाट मशीनों की संख्या 141 से बढ़कर 930 हो गई है, वहीं कल्चर जांच सुविधाएँ 5 से बढ़कर 14 तक पहुँच चुकी हैं।
उन्होंने आगे बताया कि वर्ष 2021 की तुलना में वर्ष 2025 में टीबी नोटिफिकेशन लक्ष्य के सापेक्ष उपलब्धि 76 प्रतिशत से बढ़कर 104 प्रतिशत तक पहुँच गई है। इसी अवधि में ड्रग सेंसिटिव टीबी रोगियों में उपचार सफलता दर 85 प्रतिशत से बढ़कर 92 प्रतिशत हुई है, जबकि ड्रग रेसिस्टेंट टीबी रोगियों को उपचार में बनाए रखने की दर 72 प्रतिशत से बढ़कर 87 प्रतिशत तक पहुँची है। 
महानिदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य सेवायें ने बताया कि अभियान के दौरान गंभीर एवं जोखिम वाले रोगियों के लिए डिफरेंशिएटेड टीबी केयर व्यवस्था को और मजबूत किया गया है, जिसके अंतर्गत 3.04 लाख टीबी रोगियों का विशेष आकलन किया गया है। साथ ही, टीबी के भविष्य के मामलों को रोकने के लिए टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (टीपीटी) के तहत 5.81 लाख पात्र पारिवारिक संपर्कों को निवारक उपचार प्रारंभ कराया गया है।
इस अवसर पर राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र भटनागर ने कहा कि वर्ष 2024 में चलाए गए 100-दिवसीय सघन टीबी मुक्त भारत अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, जिसमें बड़ी संख्या में छूटे हुए टीबी रोगियों की पहचान कर उन्हें उपचार से जोड़ा गया। इसी अनुभव के आधार पर फरवरी 2026 से प्रदेश में पुनः 100 दिवसीय सघन टीबी मुक्त भारत अभियान शुरू किया जाएगा, जिसके अंतर्गत सांसदों से लेकर पंचायत स्तर तक जनप्रतिनिधियों, आशा-आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वैच्छिक संगठनों और मीडिया की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। 
डॉ. भटनागर ने बताया कि आगामी अभियान के दौरान प्राथमिक विद्यालयों से लेकर उच्च शिक्षण संस्थानों तक जागरूकता गतिविधियाँ चलाई जाएँगी, औद्योगिक क्षेत्रों, शहरी मलिन बस्तियों एवं जोखिम वाले समूहों में सघन स्क्रीनिंग की जाएगी तथा माई भारत वालंटियर्स के सहयोग से जन-जागरूकता को और व्यापक बनाया जाएगा।
डॉ. शुभा मिश्रा, निदेशक (राष्ट्रीय कार्यक्रम) ने कार्यशाला का सार प्रस्तुत करते हुए कहा कि टीबी उन्मूलन की दिशा में उत्तर प्रदेश द्वारा की गई प्रगति यह दर्शाती है कि मजबूत नेतृत्व, डेटा आधारित रणनीति और जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन से ठोस परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि आगामी 100 दिवसीय सघन टीबी मुक्त भारत अभियान में जोखिम आधारित स्क्रीनिंग, समय पर जांच, उपचार की निरंतरता, टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट और नि:क्षय मित्रों की सक्रिय भूमिका को प्राथमिकता दी जाएगी।

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