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प्राकलित लागत से अधिक व्यय वाली परियोजनाएँ विषय पर व्याख्यान हुआ आयोजित

 संवाददाता लखनऊ

 रिवर बैंक कालोनी स्थित इन्जीनियर्स भवन में प्राकलित लागत से अधिक व्यय वाली परियोजनाएँ विषय पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि ख्याति प्राप्त वरिष्ठ औद्योगिक एवं पर्यावरण विशेषज्ञ  शंकर पांडे ने इंस्टीटयूशन ऑफ इंजीनियर्स में जीरो कास्ट ओवर रन प्रॉजेक्टस पर अपने विचार प्रस्तुत किये और रोमांचक तथ्य साझा किये। इं शंकर पांडे ने 1957 में रूड़की यूनिवर्सिटी से मेकैनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की और 13 वर्ष टाटा स्टील, जमशेदपुर के विशाल इस्पात सयंत्र में काम किया। उनकी गणना सब होनहार, हिम्मती और विलक्षण युवा प्रबन्धकों में की जाती थी। उन्हें टाटा स्टील ने वर्ष 1972 में टाटा समूह और उत्तर प्रदेश सरकार के पहले संयुक्त क्षेत्र के उपक्रम अल्मोड़ा मैग्रेसाइट लिमिटेड, काफलीगैर (अल्मोडा से 50 किमी उत्तर )भेजा जो कि उस समय बन्दी के कागार पर था। अदभुत जोश एवं कार्यशैली से उन्होंने विलम्बित प्रोजेक्ट को प्रतिशत कम लागत और 6 प्रतिशत कम समय में पूरा कर दिया और 14 फरवरी 1974 को डैड बर्न्ट मैनेसाइट का उत्पादन शुरू हो गया। इं पांडे ने यू०पी० और उत्तराखण्ड में 21 ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट लगाये। इं० शंकर पांडे ने बताया कि 'कॉस्ट ओवर रन की मुख्य वजह टाइम ओवर रन होती है। टाइम ओवर-रन अनिर्णय अथवा विलम्बित निर्णय के कारण पनपते हैं और कालान्तर में विकराल रूप धारण कर लेते हैं। इनसे प्रोजेक्ट कास्ट कई गुना बढ़ जाती है। उनका मत था कि कास्ट ओवर रन को शून्य रखने के लिये प्रोजेक्ट स्थापित करने वाले मुख्य प्रबन्धक को अनुभवी, कुशाग्र, इनोवेटिव, जुझारू और त्वरित निर्णयात्मक क्षमता वाला होना चाहिये और कम्पनी द्वारा उसको प्रोजेक्ट सम्बन्धी सर्वाधिकार सौंप देने चाहिये। इं शंकर पांडे ने बताया कि विदेशों में प्रोजेक्ट को तभी पूरा कहते हैं जब वह 100 प्रतिशत मानकों को प्राप्त कर ले और 95 प्रतिशत को 100 प्रतिशत तक पहुँचाने में सबसे ज्यादा मेहनत और अनुभव की आवश्यकता होती है।संस्था के अध्यक्ष  मसर्रत नूर खां ने अतिथियों का स्वागत करते हुए आज के मुख्य वक्ता का जीवन परिचय दिया। इस अवसर पर इन्स्टीटयूशन के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं कार्यक्रम के संयोजक वी बी सिंह के द्वारा बड़ी कुशलता के साथ किया गया एवं विषय वस्तु के बारे में बताया। कार्यक्रम का समापन डा० जसवन्त सिंहए मानद सचिव के धन्यवाद प्रस्ताव से हुआ।

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