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उत्तर प्रदेश पंजाबी अकादमी ने पंजाबी साहित्य विच भाई कान्हा सिंह नाभा जी दा योगदान विषय पर किया परिचर्चा का आयोजन

  संवाददाता : लखनऊ

लखनऊ । उत्तर प्रदेश पंजाबी अकादमी के तत्वावधान में पंजाबी भाषा के विख्यात सिख विद्वान लेख मानवशास्त्री एवं कोशकार भाई कान्हा सिंह नाभा जी के जन्म दिवस (30 अगस्त 1861) के अवसर पर 30 अगस्त, 2023 को आलमबाग के एक होटल में पंजाबी साहित्य विच भाई कान्ह सिंह नाभा जी दा योगदान" विषय पर एक परिचर्चा गोष्ठी का आयोजन किया गया। उक्त गाष्ठी में वरिष्ठ पंजाबी विद्वानों/लेखकों द्वारा उपरोक्त विषय पर अपने-अपने वक्तव्य प्रस्तुत किये गये।स० [दविन्दर पाल सिंह- 30 अगस्त 1861 को जन्मे भाई कान्ह सिंह नामा एक प्रसिद्ध सिक्ख लेखक विद्वान थे तथा वे अपने "गुरशब्द रत्नाकर महान कोष के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं। ब्रिटिश काल पर सिक्ख धर्म पर हो रहे ईसाईयत के हमलों को रोकने तथा गुरमति सिद्धांतों के प्रति सिक्ख समाज को  सचेत एवं जागरूक करने में तथा "सिंह सभा लहर' में क्रांतिकारी सक्रियता लाने के साथ साथ शिक्षा के क्षेत्र में सिक्ख समाज को प्रेरित करने के लिए उनका महत्त्वपूर्ण योगदान है।स० [नरेन्द्र सिंह मोगा- भाई कान्ह सिंह नाभा ने अपनी महान रचना गुरु शब्द रत्नाकर महान कोष, जिसको इनसाइक्लोपीडिया ऑफ सिखिज्म भी कहा जाता है, को 1921 से 1926 तक पांच वर्षों में लिखा और इसे पूर्ण करने हेतु विभिन्न विधाओं के विभिन्न विद्वानों का सहयोग लिया, जो 1930 में प्रकाशित हुआ। उन्होंने महान कोष में सिख धर्म के ऐतिहासिक स्थानों का विवरण अंकित करने हेतु पूरे ब्रिटिश भारत में एक विद्वान प्रद्युम्न सिंह को वर्ष 1922 से 1925 तक तीन वर्ष में व्यक्तिगत रूप से भेज कर भौतिक सर्वेक्षण कराया और प्राप्त विशेष विवरण को महान कोष में अंकित किया। उक्त सर्वेक्षण सामग्री भी गुरधान दीदार" नाम की पुस्तक के रूप में अलग से प्रकाशित की गई, जो 1925 तक उपलब्ध सिक्ख ऐतिहासिक स्थानों के विवरण का दुर्लभ दस्तावेज हैं।  मनजीत कौर- भाई कान्ह सिंह नाभा जी एक पंजाबी सिख विद्वान लेखक, मानवविज्ञानी, विश्वकोशकार और विश्वकोशकार थे। उनके प्रभावशाली कार्य महान कोष ने उनके बाद के विद्वानों की पीढ़ियों को प्रेरित किया उनके द्वारा सिंह सभा आन्दोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गयी। रनदीप कौर पंचरत्न भाई कान्ह सिंह नाभा 19वीं शताब्दी के महान सिख विद्वान तथा पंजाबी साहित्य को अपना पहला महान कोष देने वाले एक लेखक तथा बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे। अनेक भाषाओं के ज्ञाता तथा उच्च दर्जे के कवि साहित्यकार के साथ-साथ संगीत प्रेमी भी थे। अपनी पुस्तक "हम हिंदू नहीं" के द्वारा इन्होंने सिख धर्म की विलक्षणता तथा अनोखी पहचान बताई। आज भी आपकी इतिहास, धर्म और राजनीति के बारे में की गई खोजकारी तथा टीकाकारी आधुनिक युग के उभरते हुए विद्वानों के लिए प्रेरणा स्रोत है।उत्तर प्रदेश पंजाबी अकादमी के पूर्व सदस्य लखविन्दर पाल सिंह के संयोजन में विशेष सहयोग से उक्त कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से पूर्व पार्षद स० सरबजीत सिंह, स० सतपाल सिंह मीत, पूर्व पार्षद स० राजेन्द्र सिंह दुआ, स० सुखदेव सिंह मरवा, स० राजेन्द्र सिंह बग्गा, स० मनमोहन सिंह मुड़ी, स० मनमोहन सिंह लाली स० मानसिंह पनेसर, स० ओंकार सिंह पनेसर एव स० [दिलप्रीत सिंह विर्क जी उपस्थित थे। अन्त में अकादमी के निदेशक के प्रतिनिधि के रूप में एवं कार्यक्रम कॉर्डिनेटर अरविन्द नारायण मिश्र ने गोष्ठी में उपस्थित सम्मानित वक्ताओं / विद्वानों को अंगवस्त्र एवं स्मृतिचिन्ह भेंट कर सम्मानित करते हुये सभी का साधुवाद आभार व्यक्त किया।

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