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तदर्थ शिक्षकों की सेवा सुरक्षा का मुद्दा भाजपा शिक्षक विधायक देवेंद्र प्रताप जी ने सदन में उठाया

 संवाददाता:लखनऊ।


भाजपा शिक्षक विधायक देवेंद्र प्रताप सिंह ने नियम 115 के अंतर्गत सूचना प्रमुख सचिव विधान परिषद को 49 दिनों से माध्यमिक शिक्षा निदेशक शिविर कार्यालय में याचना कर रहे तदर्थ शिक्षकों को 1 वर्ष से अधिक वेतन न मिलने के कारण यह अकल्पनीय असहनीय पीड़ा के साथ-साथ घुट घुट कर जी रहे हैं सदन में सरकार ने आश्वासन दिया था कि वेतन रोकने वाले अधिकारियों को दंडित किया जाएगा सदन में सरकार द्वारा की गई घोषणा को पूरा करना मंत्री परिषद का सामूहिक उत्तरदायित्व है सरकार अपने इस संवैधानिक संसदीय दायित्व से पीछे नहीं हट सकती है और कार्यपालिका सदन में की गई घोषणा के प्रति जवाबदेह है अधिकारियों की इस प्रकार से हठधर्मिता के कारण सरकार की छवि धूमिल हो रही है सुप्रीम कोर्ट की मानसा कहीं से भी इन तदर्थ  शिक्षकों को बाहर करने का नहीं था अधिकारी सरकार को भ्रमित कर रहे हैं लोक महत्व के इस अविलम्बनीय,  तत्कालिक एवं सुनिश्चित विषय पर सरकार का ध्यान आकृष्ट करते हुए बकाया वेतन तत्काल देने और समस्या के निवारण समाधान हेतु निम्न विकल्पों में से कोई एक विकल्प स्वीकार करने की मांग करता हूं

1- तदर्थ शिक्षकों को उन्हीं के पदों पर आमेलित किया जाए।
2- 22 मार्च 2016 के शासनादेश में धारा 33 जी की घोषणा को ही लागू करने की तारीख में बदल दिया जाए।
3- जिस वेतनमान पर जो शिक्षक कार्यरत है उसी वेतनमान पर सेवानिवृत्त तक बने रहने दिया जाए।
शिक्षक विधायक का कहना है यह सभी तदर्थ शिक्षक 20 से 25 वर्षों तक विद्यालय में अनवरत वेतन प्राप्त कर रहे हैं इनकी सेवा सेवा सुरक्षा करने पर सरकार पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त बोझ नहीं।

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